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भारतीय महिलाओ को जीवन में अनेक स्वस्थ संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

महिलाओं की बहुत सी समस्याएं प्रजनन और यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है।

इनमे से अनियमित माहवारी और कष्टदाई माहवारी एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो लगभग तमाम महिलाओ ने महसूस किया और उससे झूझा है। चाहे हम बात करे अनियमित माहवारी, सफेद पानी ( जेड लिकोरिया ), खून की कमी या थकावट। महिलाओं को इन सब के कारण युटेरस में दर्द, हाथ – पैर, कमर और स्तन में दर्द, भूख कम लगना, थकान महसूस होना, कब्ज़ की समस्या होने लग जाती हैं।

बहुत सी महिलाओं की समस्याएं ज्यादा गंभीर नहीं होती हैं। इसलिए कुछ घरेलू उपाय किए जा सकते हैं और इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती है।

अजवायन के गुनगुना पानी का सेवन करना और आराम करना सबसे बेहतर घरेलू उपाय माने जाते हैं।

लेकिन जिन महिलाओं की समस्या बहुत जिद्दी होती है अर्थात घरेलू उपाय और दवाइयों से भी राहत नहीं मिलती। लेकिन किसी भी तरह इस समस्या से आजादी पाना आवश्यक होता है। क्योंकि समय से पहले मासिक धर्म रुकने से शरीर में अनेक प्रकार की जटिलताएं और अन्य शारीरिक संबंधित समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

मासिक धर्म रुकने पर होने वाली जटिलताएं।

समस्याएं संख्या 1.

बांझपन: महिला के शरीर में ओवुलेशन प्रक्रिया ना होने पर महिला की मासिक धर्म नहीं होती है। ओवुलेशन प्रक्रिया ना होने के कारण महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाती और बांझपन की समस्या पैदा हो जाती है।

समस्याएं संख्या 2.

मासिक धर्म ना होने पर आप ओस्टियोपोरोसिस का शिकार हो सकती हैं इसमें आप की हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती है।

समस्याएं संख्या 3.

मासिक धर्म ना होने पर आपको थकान महसूस होना, पेट फूलना, ऐंठन महसूस होना , मनोदशा में बदलाव, मतली या उल्टी होना एवं चक्कर आना इस तरह के गंभीर समस्याओं का सामना करना पर सकता है।

माहवारी बंद होने के कारण।

कारण संख्या 1.

मानसिक कारण: मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध, शोक, दुख, मानसिक उद्वेग या डिप्रेशन। इन सब के कारण मासिक धर्म चक्र को नियमित करने वाले दिमागी हिस्से पर विपरीत प्रभाव पड़ता है इससे ओवुलेशन और महावारी रुक जाती है।

कारण संख्या 2.

शारीरिक कमजोरी: महावारी बंद होने का एक कारण शरीर में खून की कमी, शारीरिक कमजोरी भी हो सकती है।

कारण संख्या 3.

अन्य कारण: महावारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना। माहवारी के समय इन गलतियों से भी कई बार अनियमितता या अन्य समस्याएं पैदा हो जाती है।

आयुर्वेदिक उपचार।

अश्वगंधा :

अश्वगंधा एक ऐसी जड़ीबूटी है जो हमें हमेशा काम आती हैं। यह चिड़चिड़ेपन को कम करने में मदद करता है।अश्वगंधा शरबत का नियमित सेवन करना आपके बचाव में आ सकता है। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है, अधिवृक ग्रंथि के कार्यों को मजबूत करता है और रक्त प्रवाह को उत्तेजित करता है। अश्वगंधा तनाव से लड़ने वाली महाशक्तियां भी प्रजनन क्षमता में सुधार करती हैं और महिलाओं में मासिक धर्म चक्र को नियमित करती हैं।

अजवाइन:

अजवाइन को आमतौर पर कैरम या बिशप वीड के नाम से जाना जाता है। इसमें आवश्यक तेल होता है, जो कई बायोएक्टिव यौगिकों से बना होता है, इसलिए इसका औषधीय महत्व है। अजवाइन न केवल आपके मासिक धर्म को प्रेरित करेगा बल्कि ऐंठन के दर्द से भी राहत दिलाएगा।

सौंठ:

सौंठ एक अद्भुत जड़ी बूटी है जो मासिक धर्म की ऐंठन को प्रभावी ढंग से कम कर सकती है। यह जड़ी बूटी दर्द पैदा करने वाले प्रोस्टाग्लैंडीन के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से जुड़ी थकान से लड़ने में भी मदद करता है और अनियमित मासिक धर्म को नियमित करता है।

आंवला:

आंवला में मौजूद विटामिन सी आपको फंगल इंफेक्शन और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। आंवले का जूस रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और बीमारियों को दूर रखता है। आंवले का जूस पीने से आपको सर्दी, अल्सर और पेट में संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी।

 परंतु कई बार हमें ये जड़ीबूटी या तो नही मिलती, या फिर बहुत महंगी मिलती हैं। ऐसे में हम एक आसान उपचार बता रहें है जिससे महिलाओं को ज्यादा खर्च और बाजार जानें से बचाया जा सकता है।

 हमारा देश प्राकृतिक प्रेमी और चमत्कारों से भरा हुआ है। हमारे देश में अनेक प्रकार के लाइलाज बीमारियों को ठीक करने वाले अनेक उत्पाद व चिकित्सक देश के अनेक कोनो में उपलब्ध हैं। और वेदा हेल्थ केयर आपको उन चिकित्सकों और उत्पाद तक लेकर जाता है जो किसी बीमारी या समस्या का बहुत बेहतर इलाज करने में सक्षम है। इसी कड़ी में हम आपको आयुर्वेद के एक असरकारक उत्पाद के बारे में बता रहें है जिसका नाम है स्त्री वरदान सिरप।

 यह स्त्री वरदान सिरप एक प्राकृतिक से बना महिलाओं के लिए असरकारक टॉनिक है। स्त्री वरदान में डाली गई जड़ी बूटियां अपने नाम के अनुसार ही महिलाओं को फायदा पहुंचाती हैं और महिलाओं के लिए अनेक समस्याओं से निपटने का वरदान साबित हो रही हैं। यह पूरी तरह सुरक्षित टॉनिक है। जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इसमें अशोक त्वक, आंवला, सोंठ, लोधरा त्वक, गिलोय, छोटा गोखरू, कचनार छल, चिकनी सुपारी, अजवाइन, शतावरी, हरितकी, बहेरा, अर्जुन त्वक, अजवायन, अश्वगंधा, आदि जैसे जड़ीबूटियों का मिश्रण है। स्त्री वरदान सिरप मैं डाली गई जड़ी बूटियां का मिश्रण सदियों से ही महिलाओं के लिए लाभदायक रहा है। यदि आपको अनियमित माहवारी होती है, या कई सालों से माहवारी हुई ही नहीं है तो आपको बिना नजरंदाज किए तुरंत इसका सेवन करना चाहिए।

यह रजोनिवृत्ति होने से मोटापा आने का भी इलाज करता है। कई महिलाओं ने स्त्री वरदान सिरप को अपनाया है और सालों की समस्या को जड़ से उखाड़ा है।

रजोनिवृत्ति से होने वाली अनेक प्रकार की बीमारियां जैसे बांझपन, हड्डियों की समस्या, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, पेट से संबंधित समस्या, त्वचा से संबंधित समस्या आदि जन्म लेती है इसलिए यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि इसका इलाज जल्द से जल्द किया जाए।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, चंडीगढ़ आदि अनेक राज्यों से अनेक महिलाओं ने इसे अपनाया है। अनेक महिलाए जो सालों से परेशान थी। रजोनिवृत्ति से पीड़ित थी। केवल 30 की उम्र में ही उन्हें रजोनिवृत्ति हो गई थी। जो सालों से कई डॉक्टरों के पास गई और अनेक प्रकार की दवाइयों का सेवन किया परंतु परिणाम स्वरुप कुछ न मिला। रजोनिवृत्ति के कारण उन्हें चिड़चिड़ाहट, बदन दर्द, थकावट और बेचैनी होने लगी थी। ऐसी अनेक महिलाए स्त्री वरदान सिरप का सेवन करके इस समस्या से राहत पाई है। कई बार तो स्त्री वरदान सिरप केवल 7 दिन में असर दिखा कर उन्हें राहत देती है। आज वह कहती हैं कि स्त्री वरदान सिरप उनके जीवन में चमत्कार के रूप मे आया था। इसका सेवन करके उन्हें बहुत अच्छा परिणाम मिला है।

इसे दिन में दो बार पानी के साथ भोजन के बाद लेना होता है। इसका असर आपको 7 से 15 दिन में दिखने लगेगा।

इसलिए अब इन समस्याओं से संबंधित कष्ट सहने की कोई आवश्यकता नहीं है। स्त्री वरदान सिरप को एक बार अपना कर जरूर देखें।

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